इक तमन्ना

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इक तम्मन्ना है
तेज़ बारिश हो
चाँदनी रात हो
कोई ना पास हो
बस मैं और तुम,

ना कुछ तुम बोलो
ना मैं कुछ बोलूं
बस अहसास ही अहसास हो,

थोड़ा तुम रोओ
थोड़ा मैं रोऊँ
कुछ तुम समझो
कुछ मैं समझूँ,

और जब सुबह हो
तो इक नई शुरुआत हो
बिता कल ना तुम्हें याद रहें
ना मैं कभी याद करूँ,

बस पास रहे
तो इक नया अहसास
और नयी रौशनी,

अब ये नई रौशनी
कुछ तुम लोंगो तक पहुंचाओ
और कुछ मैं,

फ़िर शायद
सबके घर में उजियारा हो
थोड़ा तुम प्यार बाँटना
थोड़ा मैं बांटू,

जब सबके ग़म दूर हों
अब थोड़ा तुम हँसना
थोड़ा मैं मुस्कराउँ
और तमन्ना पूरी हो ।।

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