मनमर्जियां – जज़्बातों से हक़ीक़त तक

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कल रात को मनमर्जियां देखी। फ़िल्म की पूरी कहानी हमारे इर्द -गिर्द के वातावरण और घटनाओं से प्रेरित लग रही थी। फ़िल्म के शुरूआत में क्रेडिट्स में अमृता प्रीतम का नाम आता है। फिल्म के ख़त्म होने पर पूरे टाइम मेरे दिमाग़ में अमृता प्रीतम घूमने लगी इसीलिए लिख रही हूँ। हो सकता है लेख़क के मन में भी कहानी लिखते समय अमृता प्रीतम की कहानी की तरह लव ट्रॉइएंगल की छाप रही होगी। आप विक्की के करैक्टर में साहिर को ढूंढ सकते हैं , जो कि काफ़ी हद तक मुझे नहीं पसंद आया। वहीं रॉबी में कहीं न कहीं इमरोज़ की झलक देखने को मिलती है , जिसने काफ़ी भावुक कर दिया और फ़िल्म को रियलिटी से जोड़े रखा। रूबी को अमृता प्रीतम की जग़ह रख सकते है। अपने पोएटिक करैक्टर्स साहिर -अमृता -इमरोज़ से बाहर आकर फिल्म का आकलन करते है। मैं हर फ़िल्म को एक अलग नज़र और अहसासों से जोड़कर देखती हूँ। कहानी की तरह ! कहानी जो रियल लाइफ से जुड़ी हो या कहानी जिसमें ज़िंदगी को एक नया नज़रिया दिया गया हो। इस कहानी कि अगर हम बात करें तो विक्की को हम अपने आस -पास ढूंढ सकते है। वो प्यार पाने की ज़िद्द , होड़ , हक़ -अजमाइशी , लड़ाई , फुकरापंथी और एक नई चीज़ जो इसमें सामने आई प्यार -फयार। मैं ये नहीं बोल रही की विक्की रूमी {तापसी } से प्यार नहीं करता होगा या उसका इश्क़ झूठा है। लेकिन यहां विक्की शादी नहीं करना चाहता या यूं कहे ज़िम्मेदारियों का डर या कुछ और ! उसे बस प्यार -फयार चाहिए और रूमी पर उसके प्यार का टैग। सबसे अज़ीब बात जो मुझे लगी हॉल में बैठे नौजवान लोग विक्की के करैक्टर से जुड़े थे और रॉबी को बेचारा बना रहे थे। हैरान करने वाली बात है कि मेरी जनरेशन के लोग क्या सोच रहे हैं उनके द्वारा हमेशा एक नेगेटिव या ग़ैर ज़िम्मेदार इंसान को फेवर क्यों किया जाता है। डिप्रेस्ड नज़रिये से क्यों जल्दी प्रेरित होते है ,उसके करैक्टर में खुद को ढालने लगते है और फ़िर वही सेम एक्शनस को भी फॉलो किया जाता है। दूसरी तरफ़ रूमी का क़िरदार है जो कि वाकई क़ाबिले-ए-तारीफ़ है। समाज में लड़कियों को रूमी जैसी परवरिश देनी चाहिए। बोल्ड इण्डिपेंडट लेडी। अपने सारे फैसलों की ज़िम्मेदारियां खुद लेने वाली ज़िम्मेदार लड़की।

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