निषेध !! रेड लाइट एरिया

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बेग़म जान देखी। ना जाने लोग क्यों वास्तविकता को देखने और उसे स्वीकार करने में कतराते हैं। एक अच्छा मैसेज था अगर किसी ने उसमें दिखायी गयी उन औरतों को “वैश्यावर्ती ” की नज़र से हटकर एक आम इंसान की तरह मानकर देखा हो तो। पता नहीं रेड लाइट एरिया को इतना बुरा क्यों समझा जाता है , वहां पर जो भी औरतें काम करती है कोई उनकी भावना क्यों नहीं समझता ? अगर उन्हें किसी ने चंद पैसों के लिए उस अँधेरे नरक में बेच दिया तो क्या वो उनकी गलती है , अगर उनके साथ रेप जैसी दर्दनाक घटना हुई और उन्हें समाज ने स्वीकारने से मना कर दिया तो वो उनकी गलती है , यहां तक की भारत और पाकिस्तान में कई लोगों के घर वाले खुद ही उन्हें उस एरिया में बेच देते है क्यों की लड़की है कल को कुछ उल्टा सीधा हो गया तो नाम खराब होगा और ऊपर से इतना दहेज़ कहाँ से लायेंगे इस से अच्छा जवान होने से पहले ही उन्हें बेच दो और भारत के कई रेड लाइट एरिया में रहने वाली औरतों की यही कहानी है। आप सब को लग रहा होगा की कैसी बहकी बहकी बातें बोल रही हूँ मैं। पर मैंने अपने बचपन से बहुत ही कम मर्दों को औरतों की इज्ज़त करते देखा है। आदमी नशा करके शाम को घर आता है और अपनी बीवी को अपशब्द बोले जाते है ,हाथ उठाया जाता है पर कोई कुछ नहीं बोलता सब लोगों के लिए ये आम सी बात है जैसे की वो बच्चों की प्लास्टिक वाली गुड़िया हो जब मन किया गर्दन मरोड़ दी। आदमी अगर किसी धंधे वाली के पास जाता है तो यह आम बात है क्यों की वो “मर्द ” है …. पर अगर औरत उसी लड़की का नाम लेले तो वो पाप बन जाता है पता नहीं क्यों ? हमेशा आदमी को उच्चतम दर्ज़ा दिया जाता है भले ही वो इस दुनिया में एक औरत की वज़ह से आया हो। ज़्यादा बोलना पसंद नहीं करूंगी क्यों की भारत में ज़्यादा बोलना और अपने विचार रखना भी पाप की तरह है या तो लोग लाठी लेकर सड़कों पर आ जाते है या देशद्रोह जैसे इल्ज़ाम लगा दिए जाते है। ना जाने वो सुबह कब आएगी जब हर किसी की एक समान इज्ज़त होगी पर इतना ज़रूर है की वो सुबह हम ही से आएगी।

10 comments

  1. Yea true It was the harsh reality of our society. But the present scenario is not same as old days. Now the people start realising that boy or girl both have same rights. and even girls can do much more than boys if they get support from the parents. If you look recent events the girls of society really make india proud.

  2. Good Job with this one! It is refreshing to know that the young journalists do think this way, we need more of such journos as they are ones who shape the minds of the mass and spread awareness on a number of issues. Keep writing and sharing, as the pen is a mighty tool.

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